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Mr. Zuber Ahmed Khan is a Muslim by birth, has got strong and stiff views on Islam. Mr. Zuber believes in Humanity when Islam is in trouble. He believes any Muslim Men or Women should die for Islam when required. Mr. Zuber Ahmed Khan completed his Post Graduate in Public Administration in the year 1995 and stands in first class. He completed his Diploma in Computer Hardware and Software Engineering from Bombay. Completed Masters Degree in Journalism & Mass Communication and stand in first Class.

Friday, 20 October 2017

सावधान आपकी लड़ाई गद्दारो से और चतुर दुश्मनो से है


खबर रही है के अगले संसदीय चुनाव २०१९ में कांग्रेस भारत के क्रिकेट इतिहास के सबसे ज़्यादा सफलतम कप्तान मोहम्मद अज़हरुद्दीन को आज़ाद भारत के सबसे सफलतम और चाहते मुस्लिम चेहरे असदुद्दीन ओवेसी के खिलाफ टिकट दे सकती है.

कांग्रेस पहले ही अपनी विश्वसनीयता मुस्लिम समाज में खो चुकी है ख़ास कर के जब उसने अनैतिक, असवैधानिक तरीके से अफ़ज़ल भाई को फ़ासी की सजा दी थी. कांग्रेस अपनी विश्वसनीयता नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी शरद पवार के भड़कावे में के शृंखला बद्ध तरीके से मुस्लिम समाज को नुक़सान पहुंचाने की वजह से भी खो चुकी है.  महारष्ट्र में एन.सी.पी. जैसी साम्प्रदाइक पार्टिओ ने मुस्लिम समाज का बहोताय नुक़सान किया है क्योकि कांग्रेस इस पार्टी के साथ सरकार में थी.  एन.सी.पी. पीठ में छूरा घोपने वाली पार्टी है और उसके प्रमुख शरद पवार का इतिहास बताने की ज़रुरत नहीं के किस तरह से उसने इटली का राग अलाप के कांग्रेस से अलग पार्टी बनाई थी.  

फिर कांग्रेस के खुद के अंदर बीजेपी और आतंकवादी संघ के मुहाफ़िज़ मौजूद है.  हैदराबाद में एन. किरण कुमार रेड्डी ने अपनी सरकार और मुख्य मंत्री की सीट सिर्फ असादुद्दीन ओवेसी की वजह से गवाई थी.  क्योके उन्होंने उसके ऊपर इलज़ाम लगाया था के वो साम्प्रदाइक राजनीति और मुसलमानो का भावनात्मक शोषण कर रहा है.  फिर ओवेसी ने कांग्रेस सरकार से सपोर्ट खेच लिया.  अब अगर कांग्रेस पार्टी कार्यकारणी गद्दारो और पीठ में छूरा घोपने वालो की बात को तरजीह देगी तो नुक्सान भुगतने के लिए तैयार रहे.  सही देखा जाय तो कांग्रेस को गद्दारो को पार्टी से निष्कासित करना चाहिए जिस तरह से अस.एम्. कृष्णा को इस पत्रकार के विरोध पत्र के ऊपर निकाल दिया था.  विरोध इस पत्रकार का कृष्णा के उस वक्तव पे था जो उन्होंने इजराइल में जा कर बहैसियत विदेश मंत्री दिया था के इजराइल और भारत नेचुरल अलाइ है और दोनों ही देश इस्लामिक आतंकवाद दे जूझ रहे है.

यहाँ पे सिर्फ तीन कारण में बहैसियत पत्रकार के समझ सकता हूँ और निष्कर्ष निकालता हूँ के अज़हर को हैदराबाद से चुनाव लड़ाने के विवाद के पीछे किया मानसिक्ता हो सकती है.

1.     ये की एन.सी.पी. का बदले की भावना का एक हिस्सा हो सकता है क्यकि हाल ही में कांग्रेस स्थिर हुई है और भिवंडी, मालेगाव और नांदेड़ जो के मुस्लिम बहुल हलके है कांग्रेस की मज़बूत स्थिति साफ़ देखी जा सकती है.  इन सभी जगहों से एन.सी.पी. का सूपड़ा साफ़ हो गया और वो युद्ध में कही भी नज़र नहीं आई तो ऐसा कर के वो कांग्रेस की इमेज को मुसलमानो के बीच नुकसान पहुंचना चाहती है.

2.     एन. किरण कुमार रेड्डी ने अपनी सरकार और मुख्य मंत्री की सीट असद उद्दीन ओवसी की वजह से गवाई थी तो अब रेड्डी की असदुद्दीन से बदले की नियत और नीति हो सकती है.     

3.      बीजेपी और आतंकी संघ इस तरह की खबरे आम कर रहे है जिसका सीधा असर गुजरात चुनाव में देखने को मिल सकता है.  जहा बीजेपी अपनी ज़मीन और जनादेश खोती जा रही है. अब अगर इस तरह की खबरे पब्लिक डोमेन में आती है तो सवाभाविक मुस्लिम सहानुभूति कांग्रेस से अलग हो जायगी वैसे भी बदनाम मुस्लिम समाज में ओछी और मुस्लिम विरोधी राजनीती के लिए कांग्रेस बदनाम है.

फिर भी अगर कांग्रेस बेवकूफी भरा निर्णय लेती है एन. किरण रेड्डी जैसे छूरा घोपने वालो के या छुपे हुए दुश्मन एन.सी.पी., बीजीपी के बेहकावे में आ के तो उसका ख़मयाज़ा कांग्रेस को ही भरना पड़ेगा. असदुद्दीन ओवेसी ने सही आकलन किया है रेड्डी का के वो साम्प्रदाइक है सिर्फ साम्प्रदाइक ही नहीं वो तो आतंकी संघ और बीजेपी के पेड़ एजेंट लगते है.  रेड्डी खूब जानते है अगर अज़हर हैदराबाद से चुनाव लड़ते है तो एक बड़े पैमाने पे वोटो का विभाजन दोनों शेरो के बीच होगा और बचे हुए वोट का फ़ायदा बीजेपी जैसे गीदड़ो को होगा.
  

अगर अज़हरुद्दीन एक भावनात्मक और समझदार राजनीतिज्ञ है तो उनको दुश्मन की चाल को समझना चाहिए के वो उनको पींजरे में सिर्फ हलाल करने के नियत से बंद कर रहा है न की उनकी सुरक्षा के लिए.  ये आतंकी संघ और बीजेपी कांग्रेस के कंदो पे रख के बन्दुक चला रहे है. ये नहीं चाहते के असदुद्दीन जैसा जुझारू, निडर इंसान संसद के गलियारों तक पहुंचे ताके मुस्लिम अवाम की दर्द से भरी, नाइंसाफी की चीखे हमको कोई भी सूना सके और उनको दबा दिया जाए.  और कोई भी संसद मुस्लिम दर्द से भरी चीख सदन के गलियारों हमको सुनाने की हिम्मत ना कर सके.