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Mr. Zuber Ahmed Khan is a Muslim by birth, has got strong and stiff views on Islam. Mr. Zuber believes in Humanity when Islam is in trouble. He believes any Muslim Men or Women should die for Islam when required. Mr. Zuber Ahmed Khan completed his Post Graduate in Public Administration in the year 1995 and stands in first class. He completed his Diploma in Computer Hardware and Software Engineering from Bombay. Completed Masters Degree in Journalism & Mass Communication and stand in first Class.

Friday, 22 September 2017

Indian refused, Bangladesh cuddles them.



Not only Muslims but Hindus are also persecuted, tortured, killed and dragged out from Myanmar.  Now they are looking for helping hands and depend on the Charity of Islamic Country Bangladesh rather to India.  Indian Government under the leadership of Terrorist mentality already clarify that they are not human and did not believe on Humanity they will not tolerate even single Rohigiya Refugees from Myanmar they will again deport them back to a place where their safety, chastity, soul is not safe.  On the other hand Bangladesh an Islamic Nation who believe in peace and Humanity pleads in UN that safe and free zone should be created for Refugees from Myanmar.

In a small village in southern Bangladesh thousands of Hindu refugees are rested from Myanmar.  They are all looking with empty and stoned eyes to the every member of the Government and non Government Charity Group with a hope for their rescue.  But their plates are not empty as all the Government and non government organisations full their empty plates with the heap of Dal and rice.

The contrast captures the sharp religious and ethnic divides that have only deepened since a convulsion of violence in Myanmar Rakhine State.  But maximum number of those who fleeing into Bangladesh are Rohingya Muslims estimated about 4,30,000 secure from the campaign of free zone from Muslims in Myanmar.  The United Nation has already amounts that violence in the category of ‘Genocide’ and “Ethnic Cleansing”.

A sizable number of Buddhists and Hindus were also come under the heat of communal vapours, which erupted after Rohingya Militants attacked on police posts in the month of 21st August 2017.  Most of the Hindus displaced with Rakhine, an estimated 500 to 1000 Hindus fled to neighbour Bangladesh, where they could find the place in the shelter and rescue camps dominated by Rohingya Muslim refugees.

One of the Hindu rescuer named as Niranjan Rudro 50 years still trembled after remembered the incident of attack over Hindus in Myanmar.  He can remembered that some people come with covered their face with mask and attacked over entire family.  Maximum Hindus said the exactly same story behind their run.   Another rescuer Puja Mollic 18 said she came to Bangladesh after losing her parents and husband in violence at Rakhine.  Further she narrated a horrific story when she arrived in Kutupalong, men tried to gang rape her she could rescue only after an uncle intervened in the matter.

Some of them said they believed their attackers were may be the members of Arakan Rohingya Buddhist Salvation Army (ARSA).

Rohingya refugees have blamed the Myanmar Army and ethnic Rakhine Buddhist mob for killing of their near and dear, attacks and arson.   Hindu and Buddhist group told that they are still terrorised with the attack over them and did not want to back again. 



Not only Muslims but Hindus are also displaced from Myanmar.  Indian Government refused to accept their refugees status whereas Bangladesh provides them shelter home. Now who is human those who are speaking mere big words like (Vikaas) or those who are indeed working for humanity.  
 

Thursday, 21 September 2017

तारक मेहता का उल्टा चश्मा सीरियल बेन होना चाहिये भाग-२



भाग-१ से जारी

पत्रकार जुबेर अपने पहले लिखे हुए लेख और उसमें दिए हुए कुछ सटीक तर्कों  को आगे बढ़ाते हुए विश्वास के साथ फिर लिख रहे हे की तारक मेहता का उल्टा चश्मा सीरियल बेन होना चाहिए.  जैसा की मेरे पहले लेख में मेने बताया हे की किस तरह से ये धारावाहिक सांप्रदायिक माहौल ख़राब कर रहा हे और इससे पहले वाले लेख में सलीम नामक लड़के और उसकी मुस्लिम टीम का ज़िक्र किया हे.  आगे जब हिन्दू लड़की के परिजन पुलिस के पास अपनी शिकायत लेके पहुँचते हे तो पुलिस उस सलीम नामक युवक तथा उसकी मुस्लिम टीम का सपोर्ट करती हे तथा हिन्दू लड़की के परिजनों को ज़लील करती हे.  जो सच्चाई से एक दम परे हे.  और ऐसी झूटी बाते दिखा कर डायरेक्टर महोदय की मानसिकता का पता चलता हे के वो किस चालाकी से एक वर्ग विशेष के लिए हिन्दू समाज के मन में ज़हर भर रहे हे.  जैसा दिखाया गया हे वैसा होता नहीं हे.  पुलिस कभी किसी मुस्लिम को सपोर्ट नहीं करती अगर ऐसा होता तो अख़लाक़, पेहलू खान, जुनेद के कातिल जेल में होते और तथा कथित गौ हत्या के इलज़ाम में मुजरिम जेल से बहार.


जिस तरह की साम्प्रदाइक मानसिकता के साथ डाइरेक्टर महोदय चीज़ो को गलत डंग से पेश कर रहे हे तो उसका प्रभाव समाज पे क्या होगा वो एक विद्वान, पत्रकार या शिक्षित इंसान ही समझ सकता हे परन्तु कॉमन भारतीय तो उसी पे विशवास करेगा जो दिखाया गया हे.


२०१४ से पहले ये धारावाहिक ऐसा साम्प्रदाइक सोच वाला नहीं था बल्कि ये गन्दी, आतंकी और साम्प्रदाइक सोच २०१४ के बाद बनी हे.  जब खूखार आतंकी और उसका संघटन बीजेपी ने देश के संसद पे ज़बरदस्ती प्रजातंत्र की हत्या कर के कब्ज़ा किया.  २०१४ से पहले ये धारावाहिक साम्प्रदाइक सौहार्द को मज़बूत करने के एपिसोड पेश करता था.


अब्दुल को ईद पे जाने के लिए सोसाइटी के सभी वर्ग पेसो का इंतज़ाम करते हे. फिर किसी कारण वंश वो अपने घर नहीं जा पाता तो उसकी पत्नी, पीता और माता जी को बम्बई बुलवाया जाता हे तथा अब्दुल और उसके परिवार का सत्कार किया जाता हे.  उनके पीता जी को दाढ़ी और टोपी में और पत्नी व माता जी को बुर्के में दिखाया गया हे. फिर पीता और अब्दुल का सत्कार सोसाइटी के मर्द और महिलाओ का सत्कार सोसाइटी की महिलाये करती हे.


लेकिन ऐसी भाई चारे वाली सोच आतंकिओ को कैसे हज़म होने लगती और २०१४ के बाद से सीरियल ने साम्प्रदाइक मोड़ ले लिया.  जब मोदी ने अपनी शपत विधि से पहले तारक मेहता की समूची क्रू मेंबर की तारीफ की थी और उन सभी को न्योता भेजा था तभी इस पत्रकार का माथा ठनका था की अब सीरियल साम्प्रदाइक रंग लेगा.


एक इंसान को अपनी सोच और विचार किसी के अधीन नहीं रखना चाहिए. अगर आतंकिओ और बन्दुक के डर से तारक मेहता के डायरेक्टर ने  अपनी सोच में तब्दीली की हे तो ऐसा आदमी किसी और दबाव में आके भारत विरोधी सोच के ऊपर भी काम कर सकता हे. अगर पहले डायरेक्टर की सोच साम्प्रदाइक सौहार्द कायम करने की थी तो २०१४ के बाद साम्प्रदाइक कैसे हो गई.

निष्कर्ष

१.            धारावाहिक का डायरेक्टर अपनी सोच एक समान नहीं रख सकता और उसकी सोच समय के साथ बदलती रहती हे और आतंकिओ के दबाव में साम्प्रदाइक हो जाती हे. जिससे भारत के साम्प्रदाइक ताने बाने को ठेस पहुँचती हे तो ऐसे धारावाहिक को बेन करना उचित होगा.

२.           जो डायरेक्टर सरकार या आतंकिओ के दबाव में आ के अपनी परम्परा, साम्प्रदाइक सौहार्द की सोच, गंगा जमुनी तहज़ीब बदल सकता हे वो आतंकिओ के दबाव में आ के कुछ भी कर सकता हे. तो ऐसे धारावाहिक को बेन करना ही उचित होगा.

३.            कोई और कारण इस धारावाहिक को बेन करने में जो मान्यवर उचित समझे.

जुबेर एहमद खान
पत्रकार

तारक मेहता का उल्टा चश्मा सीरियल बेन होना चाहिये भाग-१



तारक मेहता का उल्टा चश्मा सीरियल बेन होना चाहिये. पत्रकार ज़ुबेर ने दिये कूछ सटीक तर्क. ए सीरियल एक विशेष समूदाय के खिलाफ मासूम बच्चो मे ज़ेहर भर रहा है. स्लो पोइज़निंग.


बिलकूल बेन होना चाहिये ए बोरियत ज़्यादा फ़ेलता है ओर मनोरंजन कम कर रहा है. एक दम निचले दर्जे की कामेडी डाक्टर हाथी ओर उसका बेटा खाऊ बाताये है. बेमतलब की हसी मनोरंजन के नाम पे बोरियत. फिर ए धारावाहिक सांप्रदायिक सोहार्द भी खराब कर रहा है. एक एपिसोड मे सलीम नामक लड़का ओर उसकी मुस्लिम टीम एक हिन्दू लड़की के साथ रोड पे छेड़ खानी करते है इतना ही नही उसके पीछे ओर छाती पे हाथ मारते है. एसा तो नॉर्मली हिन्दू आतंकी करते है ओर कालेजो मे हिन्दू आतंकिओ की टीम अ.बि.वि.पि करती है फिर मुस्लिम लोगो को क्यो बदनाम किया गया. एसे धारावाहिको का बच्चो के मन मे एक विशेष समूदाय के खिलाफ ज़ेहर भरना लाज़मी है. एक एपिसोड मे एक दाडी वाले मूसलमान को सूद खोर, चोर उच्चका पेश किया है. एक एपिसोड मे पत्रकार पोपट लाल को जो गुंडा अगवा करता है उसका हूलिया शहीद बुरहान वाणी जेसा बताया है ए एक शाहिद की बेइज़्ज़ती है भारतीया सेना जेसा हूलिया क्यो नही बताया वो तो हर दिन भारत अधिकृत कश्मीर मे झालियावाला बाग़ जेसा नरसंघार कर रही है ओर आतंक मचा रही है. गौ या हिन्दू आतंकिओ जेसा हूलिया क्यो नही बताया. बुरहान वाणी किन वजहो से आज़ादी के सिपाही बने इसका ज़िक्र तक नही. वो जब मेहज़ 12 साल के थे तो उनको उनके दोस्त खालिद के साथ स्कूल जाते वक्त भारतीय फ़ौज ने पकड लिया था. फिर दोनो मासूम बच्चो के साथ थर्ड डिग्री मार पीट की गई. कूछ देर के बाद बुरहान को तो जाने दिया लेकिन बाद मे खालिद की शत विषत शव उनके घर वालो को बगेर कुछ वजह बाताय सौप दिया गया. इस हादसे का बुरहान वाणी के दिल दिमाग पे बोहोत गेहरा धक्का लगा और वो जिहादी बन गये ओर फेसबूक पोस्टर बॉय. फिर अगर उनकी या किसी ध्रम विशेष की परिवारिक या हास्य धारावाहिको मे गलत इमेज पब्लिक के सामने पेश की जायेगी तो वेसी ही मानसिकता बच्चो की ओर दूसरे समाज की उस धर्म विशेष के लिये विकसित होगी.

२ रे भाग में जारी हे..........

Monday, 18 September 2017

‘Unique’ name is enough to understand the work






Unique Public Charitable Trust is the non-governmental public trust.  This trust is established in the year June 2017 at Thane under Charity Commissioner Office.  Unique Public Charitable Trust office is situated at Belapur Navi Mumbai and office remained open to listen the grievances of the public.

Unique Public Charitable Trust the name is enough to understand the working of Trustees in the field of Education, Charity because it is established by the team of Professionals like Advocate, Journalist person having sound knowledge on education system like teacher, businessman and politically affiliated person.  

The aim and objectives of the trust to cater the society in the best possible way in the field of 

a.            Education
b.           Medical
c.            Legal
d.            Charity
e.            Publication
f.              Others

Trust started its activities for the people as per their needs.  In the remote area of Nasik Dist. Treasurer Smt. Gulnaz Khan and Secretary Zuber Ahmed Khan distributed the cloths and provided the economic help to the people displaced due to heavy rain on Sunday 17th Day of September 2017.