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Mr. Zuber Ahmed Khan is a Muslim by birth, has got strong and stiff views on Islam. Mr. Zuber believes in Humanity when Islam is in trouble. He believes any Muslim Men or Women should die for Islam when required. Mr. Zuber Ahmed Khan completed his Post Graduate in Public Administration in the year 1995 and stands in first class. He completed his Diploma in Computer Hardware and Software Engineering from Bombay. Completed Masters Degree in Journalism & Mass Communication and stand in first Class.

Tuesday, 21 November 2017

अब बीते हुए प्यार पे तकरार


पद्मावती पे बेकार विवाद गहराता जा रहा है खबर रही है के पद्मावती और अल्लाहउद्दीन की प्रेम कथा पे बनी फिल्म की नाईका बवाल से नाराज हैं दीपिका पादुकोण ने गुरू जी के इवेंट में जाने से मना किया. खबर है के दीपिका ने Global Entrepreneurship Summit (GES) से अपने आपको अलग कर लिया है.  २८ नवंबर से शुरू होने वाले इस सम्मेलन में गुरूजी नरेंद्र मोदी और यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका शामिल होने वाली हैं.  दूसरी तरफ भंसाली का सर कलम करने वाले भगवा आदेश का उत्तर प्रदेश के छोटे गुरू जी (महाराज) ने खुल के समर्थन किया है. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, अगर पद्मावती के निर्माताओं को लोग धमकी दे रहे हैं और उनपर कार्रवाई होनी चाहिए, तो भंसाली पर भी कार्रवाई होनी चाहिए.


महाराज बंसाली आपकी तरह गुंडे, मवाली या आतंकवादी नहीं है.  उन्होंने फिल्म बनाई है के किसी के सर को काटने का भगवा आदेश दिया है. आप जिस तरह आतंकवादीओ को बचाने की कवायत तेज़ कर रहे हो उससे तो साफ़ लग रहा है के आप दीपिका पादुकोण के ऊपर तुच्छ टिप्पड़ी करने वालो के साथ हो. आप सरकारी यंत्रणा का हिस्सा हो और सूबे के मुख्य आपको अब आतंकवाद की भाषा शोभा नहीं देती.  माना के आप आतंकवाद के जननकर्ता हो लेकिन अब आप अपने गुरु जी की तरह मुख्य पद पे असिन हो तो जो लोग एक महिला (दीपिका) को सिर्फ अभिनय करने के ऊपर कह रहे है जिसने उसको नंगा करके घुमाया तो इतना इनाम, जिसने उसकी नाक काटी तो उतना इनाम जिसने भंसाली की गर्दन कलम की तो इतने करोड़ इनाम रणबीर की टाँगे तोड़ के हाथ में दे देंगे और आप उनका ही बचाव कर रहे हो तो इससे साबित होता है के जिस तरह बंगलदेश ने पहले हिन्दू के ऊपर भरोसा कर के उच्चतम न्यायलय का मुख्य न्यायधीश का पद दिया था तो उसने अपनी अक्षमता और भ्रष्टाचार से साबित कर दिया के वो इस पद के योग्य नहीं है.   उसी तरह आपके गुरु जी जो केंद्र की सत्ता पे काबिज़ है उन्होंने आपको सूबे का प्रमुख पद दिया लेकिन आपकी भाषा और कार्यशैली इस बात को साबित कर रही है के आप उस पद की गरिमा को नहीं बचा पा रहे हे और अयोग्य साबित हो रहे है आपका आचरण अभी तक पहले जैसे एक आतकवादी की तरह हे.  जिस तरह बंगलादेश में रहके एक डाकू वाल्मीकि नहीं बन पाया और  उसी तरह हिन्दू स्टेट में रह के एक आतंकवादी इंसान नहीं बन पाया. 


इस पत्रकार ने अपने १२ नवंबर को लिखे लेख हिंदू मुख्य न्यायमूर्ति ने अपने ही सहिष्णु धर्म का... और हिन्दू आतंकवादीओ के मुख पत्र 'आज तक' के विवादित और एक तरफा न्यूज़ रिपोर्टिंग पे विश्लेषण किया है


कमल हसान की हिन्दू आतंकवाद इस शब्दावली के ऊपर हिन्दू आतंकवादी वि.ही.पि. ने अपने 'भगवा आदेश' में घोषणा की थी के जो कोई भी कमल हसान को गोली मारेगा या उनका सर कलम करेगा उसको इनाम दिया जाएगा.  उस भगवा आदेश के बाद इस पत्रकार ने नवंबर २०१७ को एक डिबेट में कहा था जिसका हिस्सा पेश है

हिन्दू आतंकवाद ये शब्द की देन इस पत्रकार की है. जिसने २०१० से लेकर २०१४ तक कांग्रेस शासको को अनेको पत्र लिखे की भारत में हिन्दू आतंकवाद मौजूद है इसके साक्ष भी पेश किये. फिर २०१४ के बाद अपने लेखो के जरिये लेखक इस शब्दावली को आम करता रहा और साक्ष अंतराष्ट्रीय मिडिया और समुदाय को भेजता रहा.   लेकिन अब इस शब्दावली में थोड़ा सा चेंज ज़रूरी है. अब ये शब्द वली आम हो गई है और समूचे अन्तराष्ट्री बरादरी और भारतीओ को पता लग चूका है के भारत हिन्दू आतंकवाद का नया पनाह गाहा बन चूका है. अब ये हिन्दू नियोग आतंकवाद ऐसा होना चाहिए. हलाकि इस पत्रकार ने अभी तक अपने शब्दों और लेखो में ऐसा संकल्प नहीं लिया है. लेकिन जल्द इस पत्रकार के शब्दों में उसके वाचक तब्दीली देख सकेंगे. क्योके इस शब्दावली पे लेखक का शोध चालू है और अभी शोध पूरा भी नहीं हुआ और उसने पाया है के ६०% से ऊपर हिन्दू आतंकवादी या तो नियोग प्रथा के तहत पैदा होते है या फिर नाजाइज़ तरीके से. चाहे वो हिन्दू आतकंवादी समर्थित साधू हो, साध्वी हो या कोई भगवा धारी संत इन सभी का एक काला इतिहास होता है. हां हिन्दू सामाज में अच्छे और साफ़ सुथरी छवि वाले संत भी है. जैसे आचार्या प्रमोद जी महाराज, आचार्या पागलानन्द जी आदि.

हिन्दू आतंकवादीओ की इस तरह की धमकिया और सच्चाई से रोक पत्रकार की इस बात की गवाही दे रहा हे के हार्ड लाइनर्स हिन्दू समाज में नपुंसकता आम बात है और इस बात को उजागर नहीं होने दिया जाता है तभी ऐसे किसी भी विषय पे जब भी बात चीत होती है या कोई भी फिल्म बनाई जाती है तो अपनी नपुंसकता छुपाने के लिए हूँ हल्ला किया जाता है. इतिहास गवाह है हिन्दू रानिया अपनी संतुष्टि के लिए मुस्लिम राजाओ के पास भोग विलास करने जाती थी. क्योके हिन्दू राजा आम तौर पे नपुंसक होते थे. हिन्दू राजा अपनी पुत्रीओ की शादी मुस्लिम राजाओ से कर के अपना मान बड़ा हुआ समझते थे. कहाँ कहाँ इतिहास की दुहाई दोगे रूपमती-बाजबहादुर, पद्मावती-अल्लाहउद्दीन खिलजी, जोधा बाई अकबर महान. किस किस बात को छुपाने की कोशिश करेंगे ये हार्ड लाइनर्स. पद्मावती पे इतिहास की दुहाई दे कर विवाद खड़ा कर रहे है फिर रामायण पे क्यों विवाद नहीं करते जिसमे लिखा है राजा दशरथ एक नपुंसक था फिर उसकी जोरू जंगल में एक ऋषि से मिली और उसने उसके अंदर 'नियोग' प्रथा के तहत बीज डाला. दूसरी पुस्तक महाभारत में एक स्त्री को संतुष्ट करने के लिए पांच मर्दो ने पसीना बहा दिया.  कहाँ कहाँ बचेगा ये हार्ड लाइनर्स हिन्दू समाज पद्मावती पे इतिहास को तोड़ मरोड़ने पे विवाद कर सकते है तो आज के समय भी तो वही हो रहा है जिसका नाम ये हार्ड लाइनर्स लोग लव जिहाद देते है. अपनी नपुंसकता और बेबसी को कोई और नाम काहे को दे रहे हो खुल के मैदान में आव और इस बात को तस्लीम करो के तुम्हारे अंदर वो ताक़त और मर्दानगी नहीं है जिसकी के एक स्त्री को ज़रुरत होती है



ये बात मेडिकल साइंस से साबित होती है जब मनुष्य नपुंसक या कमज़ोर होता है तो वो कुछ ऐसी हरकते करता है जिससे उसका समाज में दबदबा बना रहे और उसकी नपुंसकता का विपरीत परिणाम नहीं दिखे. अपनी नामर्दगी को छुपाने के लिए कभी ३०-४० का झुंड एक अकेले बेबस और निहत्ते इंसानो को मार के मर्दानगी मानता है.  इस कड़ी में ट्वीटर ट्रोलर भी आते है जो असभ्य भाषा, गाली गलोच, जान से मारने के धमकी देते है.  इस पत्रकार को पिछले महीनो से ट्वीटर पे बेहद गन्दी गालिओ उसके मज़हबी एतेक़ाद और परिवार के महिला सदस्यों के लिए गन्दी नीच ओछी भाषा के साथ ३० से ४० आतंकवादीओ दोवारा ट्रोल किया जाता है.  लेकिन ये अकेला पत्रकार सभी भी भारी पड़ता है.  इस पत्रकार का मानना है जैसा देस वैसा भेस अगर कोई ये समझ बैठा है के एक पत्रकार पड़ा लिखा है उसकी इज़्ज़त समाज में उतरने या उसके परिवार के महिला सदस्यों के बारे में गन्दी बात कहने या उसके मज़हबी एतेक़ाद को ठेस पहुँचाने से उसका मान सम्मान घटेगा और वो लिखना बंद कर देगा तो ये उनकी गलतफहमी हे ये अकेला पत्रकार उन सभी ३० - ४० ट्रोलर्स पे भारी पड़ता हे.  १५ नवंबर २०१७ को इस पत्रकार ने ट्वीट किया था.

इस पत्रकार को हिन्दू आतंकिओ के झुण्ड ने ट्विटर पे ट्रोल किया था हालंकि ये अकेला पत्रकार उन सभी ५० से ज़्यादा आतंकवदीओ पे भारी पड़ा था और सभी आतंकवदी को उनके सवाल का माकूल जवाब दिया था. फिर सभी अंडरग्राउंड हो गए थे फिर परसो एक ने कहा था टॉयलेट क्लीन कर उसपे इस पत्रकार ने जवाब दिया था इसका जवाब तेरेको ऊपर वाला देगा. कल बिहार में गंगा स्नान में भगदड़ में तीन लोग मारे गए फिर उत्तर प्रदेश में जर्मन नेशनल पे हिन्दू आतंकवादी हमला और अब ये दर्दनाक खबर. अभी तो और बोहोत कुछ सहना बाकी है. गऊ के नाम पे मनुष्य हत्या की थी उसमे राजिस्थान भी शामिल था अब रोक सको तो रोक लो गौ हत्या ऊपर वाला कर रहा है अब गौआतंकिओ से निवेदन है के जा कर ऊपर वाले से मार पीट करे, जब ऊपर वाले की लाठी चलती है तो सब तकलीफे और अज़ाब एक नपुंसक की तरह सहन करना पड़ता है.


कभी किसी भी बेबस महिला को मार पीट कर के या उसको प्रताड़ित कर के जान से मारने की धमकी दे के अपने आप को मर्द साबित करवाना चाहता है.  पद्मावती हो या कमल हसान एपिसोड से जुड़े हुए जान से मारने के भगवा आदेश ये सभी इस बात को साबित करने के लिए काफी है के हिन्दू आतंकवादी नपुंसक होते है जो 'नियोग' प्रथा के तहत या नजाइज़ तरीके से पैदा होते है.